Your Ad Here

Tuesday, December 30, 2008

गोमूत्र -पांच रुपये प्रति लीटर

नोट - यह ख़बर मूल रूप से दैनिक जागरण देहरादून में छापी गयी थ यहाँ सिर्फ़ हम आपके जानकारी के लिए लिख रहे है । आभार दैनिक जागरण


अब गोमूत्र भी बिक रहा है और वह भी पूरे पांच रुपये प्रति लीटर। जी हां, उत्तराखंड के टिहरी जिले में कोटेश्वरम के आयुर्वेदाचार्य स्वामी विषुदानंद महाराज के गोतीर्थाश्रम में दवाईयां बनाने के लिए न केवल आश्रम की डेढ़ सौ गांवों का मूत्र एकत्र किया जाता है, बल्कि पांच रुपये प्रति लीटर की दर पर इसे बाहर से भी खरीदा जाता है।

उत्तराखंड गोसंव‌र्द्धन समिति के संरक्षण में चलने वाले स्वामी विषुदानंद महाराज के गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के अलावा योग गुरु स्वामी रामदेव के पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में भी गोमूत्र के अर्क तथा जड़ी-बूटियों से कई रोगों की दवाइयां बनाई जाती हैं। स्वामी विषुदानंद ने बताया कि उनके केंद्र ने गोमूत्र के अर्क तथा जड़ी-बूटियों से हृदयरोग के लिए गोतीर्थ हृदयरक्षक, उच्च तथा निम्न रक्तचाप के लिए गोतीर्थ रक्तचाम नियंत्रक, मधुमेह के लिए गोतीर्थ मधुमेहहारि, शरीर के भीतरी तथा बाहरी अंगों की सूजन दूर करने के लिए गोतीर्थ शोधहर, मोटापा घटाने के लिए गोतीर्थ मेदोहर अर्क, जोड़ों के दर्द, गठिया, आर्थराइटिस के लिए गोतीर्थ पीडाहर, पेट के विकारों के लिए गोतीर्थ उदर रोग हर, खुजली और फोड़े, फुंसियों, दाद, रिंगवर्म तथा रक्त दोष जन्य विकारों के लिए गोतीर्थ अर्क, गुर्दो की कार्यप्रणाली तथा गुर्दे के रोगों के लिए गोतीर्थ लीवर टानिक, एड्स और यौन रोगों के लिए गोतीर्थ यौवन रक्षक अर्क एवं बवासीर के लिए गोतीर्थ बवासीर नाशक सहित लगभग 24 औषधियों का निर्माण किया है।

स्वामी विषुदानंद ने दावा किया कि गोमूत्र अर्क तथा जड़ी-बूटी मिश्रित औषधियों के सेवन से असाध्य और लाईलाज बीमारियां ठीक हो जाती हैं तथा ये औषधियां काफी सस्ती भी हैं जिससे गरीब लोग भी इनसे उपचार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इन पवित्र औषधियों के सेवन से केवल शरीर की रक्षा ही नहीं होती बल्कि तन, मन, विचार, विकार तथा संस्कार सभी परिशुद्ध हो जाते हैं। लोगों में नई ऊर्जा का संचार होता है तथा मानसिक शांति की अनुभूति होती है।

गोमूत्र में फासफोरस, पोटाश, लवण, नाईट्रोजन, यूरिक अम्ल, हारमोन, साइटोकाइन्स तथा जीवाणु एवं विषाणु नाशक तत्व होते हैं। गव्य रसायन शास्त्र के मतानुसार गोमूत्र में नाईट्रोजन, गंधक, अमोनिया, तांबा, फास्फोरस, कार्बोलिक अम्ल, लेक्टोज, विटामिन ए, बी, सी, डी तथा ई, एन्जाइम, हिम्यूरिक अम्ल तथा क्रियेटिव तथा स्वर्णक्षार आदि तत्व पाए जाते हैं। दुधारू गाय के मूत्र में लेक्टोज भी मौजूद रहता है जो हृदय और मस्तिष्क के रोगों में बहुत लाभकारी है। आठ महीने की गाभन गाय के मूत्र में पाचक रस [हार्मोन्स] अधिक होते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार गोमूत्र, लघु अग्निदीपक, मेघाकारक, पित्ताकारक तथा कफ और बात नाशक है और अपच एवं कब्ज को दूर करता है। इसका उपयोग प्राकृतिक चिकित्सा में पंचकर्म क्रियाएं तथा विरेचनार्थ और निरूहवस्ती एवं विभिन्न प्रकार के लेपों में होता है। आयुर्वेद में में संजीवनी बूटी जैसी कई प्रकार की औषधियां गोमूत्र से बनाई जाती हैं। गौमूत्र के प्रमुख योग गोमूत्र क्षार चूर्ण कफ नाशक तथा नेदोहर अर्क मोटापा नाशक हैं।

प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य हरिओम शास्त्री के अनुसार गोमूत्र श्वांस, कास, शोध, कामला, पण्डु, प्लीहोदर, मल अवरोध, कुष्ठ रोग, चर्म विकार, कृमि, वायु विकार मूत्रावरोध, नेत्र रोग तथा खुजली में लाभदायक है। गुल्य, आनाह, विरेचन कर्म, आस्थापन तथा वस्ति व्याधियों में गोमूत्र का प्रयोग उत्तम रहता है। गोमूत्र अग्नि को प्रदीप्त करता है, क्षुधा [भूख] को बढ़ाता है, अन्न का पाचन करता है एवं मलबद्धता को दूर करता है। गोमूत्र से कुष्ठादि चर्म रोग भी दूर हो सकते हैं तथा कान में डालने से कर्णशूल रोग खत्म होता है और पाण्डु रोग को भी गोमूत्र समाप्त करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा आयुर्वेदिक औषधियों का शोधन गोमूत्र में किया जाता है और अनेक प्रकार की औषधियों का सेवन गोमूत्र के साथ करने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद में स्वर्ण, लौह, धतूरा तथा कुचला जैसे द्रव्यों को गोमूत्र से शुद्ध करने का विधान है। गोमूत्र के द्वारा शुद्धीकरण होने पर ये द्रव्य दोषरहित होकर अधिक गुणशाली तथा शरीर के अनुकूल हो जाते हैं। रोगों के निवारण के लिए गोमूत्र का सेवन कई तरह की विधियों से किया जाता है जिनमें पान करना, मालिश करना, पट्टी रखना, एनीमा और गर्म सेंक प्रमुख हैं।

ब्रिटेन के डा. सिमर्स के अनुसार गोमूत्र खून में मौजूद दूषित कीटाणुओं का नाश करता है तथा पुराने घावों बढ़ते हुए मवाद [पीब] को रोकता है और यह बालों के लिए एक कंडीशनर की तरह उपयोगी है। दिल संबंधित रोगों, टीबी, और पेट की बीमारियों तथा गुर्दे संबंधी खराबियों में गोमूत्र और गाय के गोबर का मिश्रित इस्तेमाल काफी लाभकारी है। गुर्दे में पथरी के लिए 21 दिनों तक लगातार गोमूत्र का सेवन बड़ा लाभकारी सिद्ध होता है।

अमेरिका के डा. क्राफोड हैमिल्टन का दावा है कि गोमूत्र के प्रयोग से हृदयरोग दूर होते हैं और पेशाब खुलकर आता है। उनका कहना है कि कुछ दिन गोमूत्र के सेवन से धमानियां प्रसारित होती हैं, जिससे रक्त का दबाव स्वाभाविक होने लगता है। गोमूत्र से भूख बढ़ती है और पुराने गुर्दा रोग [रीनल फेल्योर व किडनी फेल्योर] की कारगर दवा है।

आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण आचार्य के अनुसार पंचगव्य चिकित्सा प्रणाली के द्वारा रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने और सुदृढ़ करने हेतु आधुनिक तकनीकों द्वारा अनेक अनुसंधान किए गए हैं। इसी श्रृंखला में गोमूत्र का चूहों की रोगप्रतिरोधी क्षमता पर प्रभाव का अध्ययन किया गया जिसमें पाया गया कि गोमूत्र में कुछ ऐसे रसायन तत्व मौजूद हैं जो प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत करते हैं और शरीर की जीवनी कैंसररोधी गुण भी होते हैं।

स्वामी विषुदानंद महाराज ने बताया कि गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र नागपुर द्वारा किए गए अनुसंधान में पाया गया कि गोमूत्र कैंसर के उपचार में भी लाभकारी है तथा साथ ही कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाईयों को भी प्रभावशाली बनाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय चिकित्सा पद्धति में परंपरागत ढंग से उपयोग होने वाले तरीके विशुद्ध वैज्ञानिकता पर आधारित हैं। पंचगव्य चिकित्सा पद्धति केवल अपने देश में ही नहीं प्रभावी है, बल्कि इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन भी अपने स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार टीबी जैसे रोग में इन दवाओं के साथ गोमूत्र का उपयोग करने पर न केवल दवा की कम मात्रा से ही रोग नष्ट हो जाता है, बल्कि औषधि लेने के कार्यकाल में भी काफी कमी आ जाती है जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है।

गोतीर्थाश्रम के आचार्य ने बताया कि गोमूत्र के तरह गोबर में भी अनेक औषधीय गुण मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि इटली के अधिकांश सेनेटारियमों में गोबर का प्रयोग किया जाता है वहां हैजा तथा अतिसार के रोगियों में ताजा पानी में गोबर का रस घोलकर देना दोषरहित चिकित्सा मानी जाती है। जिस तालाब में हैजे के कीटाणु हो जाते हैं, उसमें गोबर डालने से उनका सफाया हो जाता है। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड के प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो जीई बीगेंड ने गोबर के अनेक प्रयोगों से सिद्ध कर दिया है कि गाय के ताजे गोबर में तपेदिक तथा मलेरिया के कीटाणु मर जाते हैं। उन्होंने बताया कि ताजे गोबर का रस पंचगव्य का मुख्य अंश है जिसके प्रयोग से देह, मन और बुद्धि के विकारों का नाश होता है। उन्होंने कहा कि गोपालन के द्वारा उनके दूध, घी, मक्खन तथा उनसे बने पदार्थो एवं गोमूत्र और गोबर से बनी औषधियों से देश के करोड़ लोग स्वस्थ्य और निरोग बनने के साथ ही इनके व्यवसाय से लोगों की आर्थिकी मजबूत होगी साथ ही देश भी अंतरराष्ट्रीय अंतर पर इन औषधियों का व्यवसाय कर आर्थिक रूप से मजबूत हो सकेगा।

Monday, December 29, 2008

बिहारी भइया अमेरिका के मेयर ( ठाकरे भाई अब क्या ?)

पिछले दिनों न्यूज़ पेपर में ख़बर देखा तो सोचा आप लोगो के साथ शेयर करू ख़बर ये है की -
भारतीय मूल के डाक्टर प्रकाश नारायण को अमेरिका के कैलीफोर्निया में साइप्रस शहर का मेयर चुना गया है। बिहार में जन्मे प्रकाश 28 साल पहले अमेरिका में बस गए थे।

मेयर का चयन करने वाली पांच सदस्यीय सिटी कांउसिल ने सर्वसम्मति से डा. नारायण को इस पद के लिए चुना। वह दिसंबर 2009 में पूर्ण मेयर के रूप में कार्यभार संभाल लेंगे। उल्लेखनीय है कि कैलीफोर्निया प्रांत में एशियाई मूल के लोगों की आबादी काफी अधिक है। इसमें भारतीय मूल के लोगों की अच्छी-खासी भागीदारी है।

उल्लेखनीय है कि दो साल पहले साइप्रस की सिटी कांउसिल के सदस्य के चुनाव में डा नारायण ने सात उम्मीदवारों को हराया था। बिहार के दरभंगा मेडिकल कालेज से चिकित्सा स्नातक डा. नारायण ने साइप्रस सिटी कांउसिल का सदस्य चुने जाने के बाद भी डाक्टरी का पेशा जारी रखा है। अब क्या ओबामा को भी कार्यकर्ता बुलाना पड़ेगा हिन्दी भासियो को भगाने के लिए जैसा की राज ठाकरे ने किया ?


Friday, December 26, 2008

ताऊ ने गाँव वालो को बेवकूफ बनाया ( मजाक)

ताऊ आप नाराज मत होना विनती है ।

ताऊ ने जब से बटेऊ को इंगलिश मे पछाडा था बहुत ही ज्यादा अंग्रेजी बोलने लगा था बात बात पर एस नो वैरी गुड करता रहता था।


एक बार की बात है ताऊ के गाँव में दो अंग्रेज आ गए ताऊ के गाव का सरपंच सकते में आ गया की अब अंग्रेजो से बात कौन करे तभी सरपंच जी को ताऊ की याद आ गई क्युकी ताऊ एक बार
बटेऊ को इंगलिश मे पछाडा था

अब सरपंच जी खुशी खुशी ताऊ के घर पहुचे और ताऊ से बोले : ताऊ अपने गाव में दो अंग्रेज आए है ।
ताऊ को सिर्फ़ अंग्रेजी के तीन सब्द आते थे
१ yes
2 no
3 very good

सरपंच जी खुशी- खुशी ताऊ को लेकर अंग्रेज के पास पहुचे अंग्रेज ने ताऊ से हाथ मिलाया और बोला।
Hi what is your name?
ताऊ बोला - yes
अंग्रेज - ओके your name is yes
ताऊ - no
अब अंग्रेज गुस्सा हो गया उसे लगा ताऊ उसका मजाक उडा रहा है उसने दो तमाचे ताऊ को जड़ दिए और चलता बना ।
ताऊ- very Good
अब जो लोग गाँव के ताऊ से जलते थे उनको मजा लेने का मौका मिल गया ओ बोले क्यों ताऊ तुम्हे इतनी अंग्रेजी आती थी तो ओ तुम्हे मारा क्यों ?
ताऊ ने सीधा सा जवाब दिया
ओ तो मुझे मारा इसीलिए कि तुम इतना पड़े लिखे होकर इन जाहिलो के साथ क्यों हो और मुझे यु, एस ,चलने को बोला मै मना किया तो गुस्से में हाथ उठ गया .

Thursday, December 25, 2008

कुत्तो का कब्रिस्तान



कुत्तो का कब्रिस्तान



शहादत चाहे इंसान की हो या जानवर की, उसे हर कोई सलाम करता है। मध्यप्रदेश के इंदौर के एक परिवार ने अपने कुत्ते की शहादत की याद में एक कब्रिस्तान बनवाया है, जिसमें सिर्फ कुत्तों को दफनाया जाता है।

बात 1992 की है, जब इंदौर में सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी। यहां के चंदन नगर के रहने वाले नौशाद हुसैन के घर पर कुछ दंगाइयों ने हमला बोल दिया। तब उनके कुत्ते ने दंगाइयों को घर के भीतर घुसने नहीं दिया। हालांकि इस कोशिश में उसकी जान चली गई। नौशाद ने अपने कुत्ते की शहादत को यादगार बनाने की ठान ली। पुलिस विभाग में कार्यरत नौशाद ने अपने संकल्प को अमली जामा पहनाते हुए कुत्तों के लिए कब्रिस्तान बनवाया है। अभी तक इस कब्रिस्तान में 200 कुत्तों को दफनाया जा चुका है। यहां कुत्तों के दफनाने पर आने वाला पूरा खर्च नौशाद हुसैन खुद वहन करते हैं।

कही आप अपने कुत्तो को वहा ले जाने की तो नही सोच रहे है ?




संता और बंता

संता (बंता से)- शराब से ज्यादा नुकसान तो पानी ने पहुंचाया है।

बंता (संता से)- नही भाई, आप गलत कह रहे हैं।

संता- क्यों, पिछले साल बाढ़ से हजारों लोग नहीं मरे थे?





Wednesday, December 24, 2008

बुश की सुरक्षा ऐसे !!! कार्टून


गूगल को टक्कर देगा भारतीय अनुसन्धान !!!




जी हाँ अब आप इन्टरनेट के द्वारा अपना घर देखने के लिए गूगल अर्थ की जगह भारतीय भुवन का उपयोग कर सकते है ऐसा मानना है की यह मार्च के अंत तक लॉन्च किया जाएगा और इसकी खाश बात ये है की यह विश्व की हाल में ली गई तस्वीरे दिखायेगी !
गूगल की इमेज और मानचित्र वेबसाइट अर्थ को टक्कर देने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन [इसरो] ने इसके जवाब में भुवन लांच करने की तैयारी की है।

भुवन मार्च 2009 में शुरू किया जाएगा। यह आपदा प्रबंधन और सैन्य अभियानों सहित अन्य महत्वपूर्ण अभ्यासों में महत्वपूर्ण साबित होने वाले पांच मीटर की श्रेणी के उच्च क्षमता के इमेजरी डेटा [मानचित्रीय आंकड़ा] उपलब्ध कराएगा। इसरो के जियो इंफार्मेटिक्स डेटा डिविजन के प्रमुख एसके पठान ने बताया कि गूगल अर्थ से उच्च गुणवता वाले डेटा उपलब्ध होते हैं, जिनकी श्रेणी एक मीटर से भी कम होती है। यह आंकड़ा दो या तीन साल पुराना होता है और महत्वपूर्ण अभ्यासों के लिए ये लाभदायक नहीं होते। लेकिन भुवन प्रासंगिक आंकड़े उपलब्ध कराएगा।

उन्होंने कहा कि इसरो द्वारा शुरू किया जाने वाला भुवन आंकड़ों की गुणवत्ता के मामले में गूगल अर्थ से अच्छा विकल्प साबित होगा। भुवन का अर्थ पृथ्वी है। यह कृत्रिम उपग्रहों से तस्वीरें लेगा और पांच मीटर की श्रेणी तक की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें उपलब्ध कराएगा। ये तस्वीरें महत्वपूर्ण अभ्यासों जैसे आपदा प्रबंधन और सैन्य अभियानों में इस्तेमाल में लाई जा सकेंगी।

वास्तविक अभियानों के समय नए इमेजरी आंकड़ों का काफी महत्व रहता है। इन अंाकड़ों से किसी विशष्ट स्थान की स्थलाकृतिक संरचना [टोपोग्राफी] ऊंचाई, गहराई और अन्य विशेषताओं का पता चल जाता है। उन्होंने कहा कि इन सूचनाओं की जरूरत बाढ़ प्रबंधन या चक्रवाती तूफान के बाद आपदा निवारण जैसे बड़े अभियानों में होती है। इन आंकड़ों का उपयोग लोक सेवाओं, आंतरिक सुरक्षा, शहरी आयोजना और ढांचागत विकास जैसी गतिविधियों के प्रबंधन में होता है। भुवन के शुरू हो जाने के बाद ऊपरी भू सतह और नीचे छुपे उत्कृष्ट खनिजों के संदर्भ में इसरो के पास पूरी पृथ्वी की मैपिंग उपलब्ध हो जाएगी।



चलो अब हम दुनिया घुमेगे भारतीय भुवन से



Tuesday, December 23, 2008

आश्चर्य !!!! ( १ ) जहां नहीं सजती आभूषण की दुकानें

नमस्कार मै इस कड़ी में आपको कुछ अस्चर्यजनक बाते बताऊगा शुरुवात आज से !
आश्चर्य (१)

हिंदुस्तान में ऐसा कोई बाजार नहीं होगा, जहां सोने के आभूषणों की दुकान नहीं हो। लेकिन कांगड़ा जिले [हिमाचल] का बैजनाथ कस्बा इस मामले में अपवाद है। यहां आभूषणों की एक भी दुकान नहीं है। कहते हैं, दुकानें तो यहां कई लोगों ने खोलीं, मगर या तो इनको खोलने वाले उजड़ गए या फिर उनकी दुकान तबाह हो गई।

यही कारण है कि बैजनाथ कस्बे में कोई भी सुनार आज तक आभूषणों की दुकान खोलने का साहस नहीं कर पाया है। दिलचस्प तो यह है कि बैजनाथ से महज आधे किलोमीटर के फासले पर बसे पपरोला बाजार में आभूषणों की करीब पचास दुकानें हैं। बैजनाथ में सुनारों की दुकानें न होने के पीछे एक शाप को कारण माना जाता है।

यहाँ के लोगो का कहना है कि मां पार्वती ने एक बार भगवान शिव से सोने का महल बनाने की प्रार्थना की थी। इसके बाद शिव ने विश्वकर्मा के माध्यम से सोने का भवन रावण की लंका में बनवाया था। इस स्वर्ण महल में प्रतिष्ठा का कार्य चल रहा था तथा रावण के पिता विश्रवा एक पुरोहित के रूप में इस कार्य को संपन्न करवा रहे थे। बाद में जब भगवान शिव ने पुरोहित विश्रवा से दक्षिणा के बारे में पूछा तो विश्रवा ने शिव से दान के रूप में सोने की लंका ही मांग ली। शिव इस मांग को ठुकरा नहीं पाए। उसी समय लंका का निर्माण करने वाले विश्वकर्मा के वेश में एक सुनार वहां पहुंच गया तथा उसने इस महल को बनाने का मेहनताना मांगा। जिस पर शिव ने उसे धन दे दिया। तभी असली विश्वकर्मा वहां पहुंच गए। शिव व पार्वती को सच्चाई का पता चला तो मां पार्वती ने गुस्से में आकर विश्वकर्मा के वेश में आए सुनार को शाप देते हुए कहा कि जिस भी स्थान पर मैं और भगवान शिव अ‌र्द्धनारीश्वर रूप में होंगे तुम वहां कुछ नहीं कमा पाओगे। बैजनाथ मंदिर में भी शिव व पार्वती अ‌र्द्धनारीश्वर रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि उस शाप के कारण ही यहां कोई भी सुनार अपना कारोबार नहीं कर पाया। हालांकि यहां सुनार के तीन-चार परिवार हैं, मगर कोई भी आभूषण का कारोबार नहीं करता।

बैजनाथ के बुजुर्ग हरनाम कौशल व पंडित मस्त राम का कहना है कि यहां कुछ दशक पहले कई आभूषण व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोली थीं, लेकिन वे उजड़ गए। इनमें होशियारपुर का एक व्यवसायी तो अपना सारा धन गंवा बैठा था, जबकि एक दुकानदार की यहां दुकान नहीं चली थी तथा उसने बाद में नगरोटा बगवां में अपनी दुकान खोली थी। वहीं बैजनाथ मंदिर से जुड़े पुजारी ज्योति प्रकाश का कहना है कि यहां कोई शाप है इस बारे में वह नहीं जानते।

यह भी दिलचस्प है कि रावण की शिव भक्ति के कारण बैजनाथ में दशहरे के दिन रावण का दहन भी नहीं किया जाता। यहां इस बारे में भी मान्यता है कि जो भी रावण के पुतले को आग लगाता है, वह अगले दशहरे तक जीवित नहीं रह पाता।

Monday, December 22, 2008

कभी ब्रिटिश सेना में थे महात्मा गांधी!

क्या है सच्चाई ???
जिस ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए उन्होंने अंहिसा को अपना प्रमुख हथियार बनाया वही गांधी कभी ब्रिटिश फौज का हिस्सा भी थे। यह बात भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन पूरी तरह सच है। रक्षा मंत्रालय ने ब्रिटिश फौज की वर्दी में बापू की फोटो प्रकाशित की है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित होने वाली 'सैनिक समाचार' पत्रिका के 100 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में एक स्मारिका प्रकाशित की जा रही है। स्मारिका में फौजी वर्दी में गांधीजी की फोटो सहित इतिहास के कई दुर्लभ तथ्यों को शामिल किया गया है।

1889 में ब्रिटिश सेना में शामिल हुए गांधी ने एम्बुलेंस यूनिट में काम किया था। इतना ही नहीं अफ्रीका में बोअर युद्ध में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें पदक देकर सम्मानित भी किया गया था। स्मारिका में प्रकाशित लेख के अनुसार गांधी को फौज में जगह देना अंग्रेजों के लिए तो चुनौतीपूर्ण था ही खुद गांधी के लिए भी यह कम बड़ी चुनौती नहीं थी। तब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में थे। बोअर युद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश फौज में एम्बुलेंस इकाई के गठन का सुझाव दिया। कुछ अंग्रेज अधिकारियों ने उनके सुझाव की खिल्ली उड़ाई। नटाल के गवर्नर गांधीजी के मित्र थे। उनकी मदद से गांधीजी एम्बुलेंस यूनिट स्थापित करने में सफल हो गए। गांधी के इस सुझाव के पीछे कुछ खास वजहें थीं।

बोअर युद्ध में अंग्रेजों की स्थिति कमजोर थी। अफ्रीका की 48 हजार सैनिकों की फौज के मुकाबले उनके पास सिर्फ 27 हजार की सेना थी। उल्लेखनीय है कि गांधीजी द्वारा बनाई गई एम्बुलेंस यूनिट में 1100 भारातीय

थे जिनमें 800 गिरमिटिया मजदूर थे। युद्ध के दौरान इस यूनिट ने बहादुरी की मिसाल कायम की।







दमन डे!! अनोखा


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी


दिसम्बर - शायद कम ही लोग यह जानते है की १९ दिसम्बर को हमारे यहाँ भारत के एक केन्द्र शाशित राज्य दमन & दिव में एक अनोखे तरह का आयोजन किया जाता है ! १९ दिसम्बर को दमन डे मनाया जाता है लेकिन
यह अलग बात है की इस दिन को हर रास्ट्रीय त्यौहार की तरह दारू की दुकाने बंद नही कीजाती , जगह जगह नेताओ की भासन नही सुनना पड़ता और न ही किसी को किसी के घरजकर एक दुसरे को बधाई देने की जरूरत होती है

इस दिन को लोग मिलते जुलते तो है एअक दुसरे से पर किसी के घर में नही बल्कि सपना , चादनी या कैरिश्मा टाइप बार में और पुरे नही आधे होशो -हवाश में , है खाश बात ?

चलिए अब मै आपको यहाँ की कुछ गतिविधिया जो की १९ दिसम्बर के लिए होती है बता दु।
१८ को अगर आप शाम को दमन की सड़को पे निकलगे तो सजती हुई दुकानों को देखकर ऐसा एहसास होता है की जैसे कल के भारत मिलाप की तैयारी हो रही हो मगर भाई एक बात भिन्न होता है भारत मिलाप में मिठाई की दुकाने सजती है और यहाँ दारू की।
अगले दिन सरे सरकारी गैर सरकारी संस्थाने बंद रहती है . ऑटो टैक्सी वालो की मानो जैसे धूम सी जाती है सुबह पहली फ्लाईंग रानी से लेकर दोपहर के सौरास्त्र एक्सप्रेस तक सूरत और मुंबई से आने वाले और जिनके पास ख़ुद का साधन है अपनी निजी गाड़ी से दमन आते है
दरिया किनारे हाथ में ५००० स्ट्रांग बियर या फ़िर कोई देसी रम आदि लेकर लोग बाटल हवा में और ख़ुद नशे में लहराते रहते है , कभी कोई परिचित मिल गया तो नशे में ही थोडी बहुत बाते कर ली नही तो अपने में ही मस्त


मजे की बात तो यह होती है की यहाँ आने के बाद अपनी निगाह में थोड़ा महिलाओ की इज्जत कम हो जाती है क्योकि सायद कम ही सुना जाता है की महिलाये पियक्कड़ है पर यहाँ देखने को मिलाताहै की कितनी आगे है
पुरे दिन यही चलता है लोग आते है पीते है और
गाँधी जी को चिडाकर चले जाते है की देख लो तुम्हारे प्रदेश में बंद हुआ तो क्या हुआ बगल मेंही पी रहा हु !!!!!!

Monday, December 01, 2008

ताज्जुब नही !!! अगर आतंकवादी आ गए तो


मुंबई में हुए लगातार ६० घंटे की महातान्डव जो की आतंकवादियो के द्वारा खेला गया
अब पता नही ये आतंकवादी कहा से आए पर अगर प्रशाशन मोदी और केन्द्र सरकार की माने तो उनके हिसाब से ये सारे आतंकवादी पाकिस्तान और कराची से पानी के रस्ते हमारे हिंदुस्तान की जान ( ना की सिर्फ़ ठाकरे बंधुओ ) मुंबई के ताज यानि की हिंदुस्तान की ताज पर आकर कब्जा जमाया भले ही वह सिर्फ़ ३ दिन के लिए ही सही ।
अब बात ये आती है की चारो तरफ़ जो की हमारी आम जनता बोली जाती जिसमे से एक मै भी हु यह कहते सुन रहा हु की " भला बताइए ये साले ( माफ़ करना मै तो किसी और को नही कहता पर इनको मै भी यही कहता हु ) गुजरात से मुंबई तक कैसे गए ?
लेकिन मै आप सबको एक सच बताने जा रहा हु जो की मै पिछले १८ महीने से देख रहा हु ।दरअसल मै यहाँ गुजरात और मुंबई के सीमा पर रहता हु अब मै जब से ट्रेन से यात्रा कर रहा हु कभी मेरा टिकिट( ये अलग बात है की मै बिना टिकिट यात्रा नही करता ) या सामान नही चेक हुआ न तो मेरा लैपटॉप या अन्य सामान चेक हुआ अब आप ये बताओ अगर मेरी जगह कोई आतंकवादी अगर रहेगा तो १८ महीने में पता नही कितने बोरे बम्ब गुजरात से मुंबई कर सकता है
पिछले महीने मै मुंबई शिवाजी टर्मिनस से वाराणसी के लिए गया मेरे पास २ एयर बैग १ लैपटॉप २ इन्टरनेट एक्सेस कार्ड था मुझे एक बार भी रस्ते में कोई ये नही पूछा की आप क्या करते हो और ये सब का बिल या आपका परिचय पत्र है क्या ।
अब आप सोचो क्या आतंकवादियो के लिए स्पेशल लिखा हुआ ट्रेन आता है क्या की ( आतंकवादियो के लिए आराछित ) वो भी तो हम आम लोगो की तरह जाते है
वही पुलिस वाले हर बिहारी से आराम से सामान के मुताबिक १००-५० रुपये नजराना लेते है जैसे की अपनी बहन की गोदभराई के लिए भीख माग रहे हो सोरी ज्यादा बोल दिया न पर क्या करू त्रस्त हु ।
दूसरी तरफ़ हमारे ट्रेन के सहचालक जिनको की बड़े प्यार से गार्ड बोला जाता है ओ भाई साहब भी कम नही होते ट्रेन रुकते ही कुछ मजदुर टाइप के लोग आकर ढेर सारे कार्टून लगेज में डाल देते है और ये महाशय सिर्फ़ ये पूछते है की पेपर है और मै अपनी आँखों से देखा है पेपर सिर्फ़ नोट लपेटने के लिए होता है अन्दर नोट होती है कम होता है तो काफी टाइम तक ट्रेन को रुकवा के रखते है और कभी भी भाई साहब ये नही पूछते की कार्टून के अन्दर क्या है क्युकी इनके ऊपर देश प्रेम से ज्यादा स्त्री और संतान प्रेम होता है हो सकता बच्चे के लिए नोकिया एन ९५ या बेटी के लिए नयी स्कूटी लेनी हो अगर ये पूछ लेगे तो सामने वाला इनकी वाली ट्रेन से सामान नही भेजेगा और भी तो ट्रेने है ।
तो ताज्जुब नही भइया आतंकवादी इन्ही रास्तो हमारी आपकी तरह गए है ।

ताऊ की प्रेरणा से चित्र

Saturday, November 29, 2008

हंगामा है क्यूं बरपा.. थोडी सी जो पी ली है..

लेखक - अकबर एलाहबादी


हंगामा है क्यूं बरपा.. थोडी सी जो पी ली है..
डाका तो नहीं डाला.. चोरी तो नहीं की है..
उस मे से नही मतलब.. दिल जिस से है बेगाना..
मकसुद है उस मे से.. दिल ही मे जो खिंचती है..
सूरज में लगे धब्बा.. कुदरत के करिश्में हैं..
बुत हमको कहें काफ़िर.. अल्लाह की मर्ज़ी है..
ना तजुर्बाकारी से वाईज़ की ये बातें हैं..
इस रंग को क्या जाने.. पूछो तो कभी पी है..
वा दिल में की सदमे दो.. या की मे के सब सह लो..
उनका भी अजब दिल है.. मेरा भी अजब जी है..
हर ज़र्रा चमकता है.. अनवार-ए-इलाही से..
हर सांस ये कहती है.. हम हैं तो खुदाई है..
हंगामा है क्यूं बरपा.. थोडी सी जो पी ली है..
डाका तो नहीं डाला.. चोरी तो नहीं की है..
थोडी सी जो पी ली है..

मेरे बारे में !!!

साँस लेते हुए भी डरता हूँ
ये न समझें कि आह करता हूँ

बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब
मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ

इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है
साँस लेता हूँ बात करता हूँ

शेख़ साहब खुदा से डरते हो
मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ

आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज
शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ

ये बड़ा ऐब मुझ में है 'यारो'
दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ

दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला
बुत के बंदे तो मिले अल्लाह का बंदा न मिला

बज़्म-ए-याराँ से फिरी बाद-ए-बहारी मायूस
एक सर भी उसे आमादा-ए-सौदा न मिला

बज़्म-ए-याराँ=मित्रसभा; बाद-ए-बहारी=वासन्ती हवा; मायूस=निराश; आमादा-ए-सौदा=पागल होने को तैयार

गुल के ख्व़ाहाँ तो नज़र आए बहुत इत्रफ़रोश
तालिब-ए-ज़मज़म-ए-बुलबुल-ए-शैदा न मिला

ख्व़ाहाँ=चाहने वाले; इत्रफ़रोश=इत्र बेचने वाले;
तालिब-ए-ज़मज़म-ए-बुलबुल-ए-शैदा=फूलो

ं पर न्योछावर होने वाली बुलबुल के नग्मों का इच्छुक

वाह क्या राह दिखाई हमें मुर्शिद ने
कर दिया काबे को गुम और कलीसा न मिला

मुर्शिद=गु्रू; कलीसा=चर्च,गिरजाघर

सय्यद उठे तो गज़ट ले के तो लाखों लाए
शेख़ क़ुरान दिखाता फिरा पैसा न मिला


Thursday, November 27, 2008

ये कहा जा रहे है हम्?

काफी समय पहले ऍक गीत आया था " ये कहा गये हम यु साथ चलते२"

आज जमाना बदल गया
सुबह जब मै घर से ऑफिस के लिए निकला तो हर रोज की तरह धोबी कपडे धो रहा दुकानदार दुकान में धूपबत्ती दिखा रहा था बच्चे खेल रहे थे ! सब मिलाकर सिर्फ़ इतना कहना है की सब कुछ सामान्य दिख रहा था

लेकिन जब ट्रेन में बैठने गया तो जहा कभी खड़े होने की जगह नही रहती थी आज लोग शान से टांग फैलाकर सोते हुए नजर रहे थे मुझे ताज्जुब हुआ होना लाजिमी भी था !
मैंने एक बहुत ही अधेड़ टाइप के भाई साहब से पूछा तो उन्होंने हसते हुए जवाब दिया " अरे यार भला कभी तो सीट मिली जा बैठ इधर आज अपना मुंबई में बोम्ब ब्लास्ट हुआ है बस उसी का नतीजा है "
पर उसके कहने से मै एक बात का नोटिस किया की बंद जैसे किसी प्रशस्ति पत्र के मिलाने का कारन बता रहा हो अन्दर इतना गुमान था !
अब दुसरे तरफ़ देखिये १८-२० साल के लडके आपस में बात कर रहे है !
पहला -अबे बेन के ....... आज तो मैंने टिकेट ही नही लिया
दूसरा -अबे साले तुझे आज भी चैन नही है आज तो आखा फोर्स टी टी मुंबई में गयेला है तेरा टिकेट कौन चेक करेगा तेरा बाप्पू या तेरी ............

मै ये नही कहता की सोचते ही नही है आज देश की ये स्थिति है की सभी लोग खूब सोचते है पर क्या सोचते
है सिर्फ़ अपनी सलेरी बदने के बारे में अपने बच्चो के दाखिले के बारे में अपने माँ बाप के बारे नही अपने बहिन के बारे नही
ये सब तो छोड़ो अपने देश के बारे में भी नही
ख़ुद का बच्चा है तो उसके किए रेस्पेक्ट से बात करेगे और उसे अच्छी बाते बतायेगे और अगर उसी उमर का कोई गैर लड़का और थोड़ा गरीब या लाचार है तो उसके साथ गन्दी गन्दी मजाक करेगे और ये सभी कराने वाले एक अच्छे समाज में गिने जाते है
शर्म नही आती ऐसी ओची हरकते करते हुए।


बस अभी तो इतना हे लिखुगा आगे आप सब का आशीर्वाद रहेगा तो ...............................
पर समझ में नही आता ये कहा जा रहे हम ???????????