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Monday, December 22, 2008

कभी ब्रिटिश सेना में थे महात्मा गांधी!

क्या है सच्चाई ???
जिस ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए उन्होंने अंहिसा को अपना प्रमुख हथियार बनाया वही गांधी कभी ब्रिटिश फौज का हिस्सा भी थे। यह बात भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन पूरी तरह सच है। रक्षा मंत्रालय ने ब्रिटिश फौज की वर्दी में बापू की फोटो प्रकाशित की है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित होने वाली 'सैनिक समाचार' पत्रिका के 100 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में एक स्मारिका प्रकाशित की जा रही है। स्मारिका में फौजी वर्दी में गांधीजी की फोटो सहित इतिहास के कई दुर्लभ तथ्यों को शामिल किया गया है।

1889 में ब्रिटिश सेना में शामिल हुए गांधी ने एम्बुलेंस यूनिट में काम किया था। इतना ही नहीं अफ्रीका में बोअर युद्ध में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें पदक देकर सम्मानित भी किया गया था। स्मारिका में प्रकाशित लेख के अनुसार गांधी को फौज में जगह देना अंग्रेजों के लिए तो चुनौतीपूर्ण था ही खुद गांधी के लिए भी यह कम बड़ी चुनौती नहीं थी। तब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में थे। बोअर युद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश फौज में एम्बुलेंस इकाई के गठन का सुझाव दिया। कुछ अंग्रेज अधिकारियों ने उनके सुझाव की खिल्ली उड़ाई। नटाल के गवर्नर गांधीजी के मित्र थे। उनकी मदद से गांधीजी एम्बुलेंस यूनिट स्थापित करने में सफल हो गए। गांधी के इस सुझाव के पीछे कुछ खास वजहें थीं।

बोअर युद्ध में अंग्रेजों की स्थिति कमजोर थी। अफ्रीका की 48 हजार सैनिकों की फौज के मुकाबले उनके पास सिर्फ 27 हजार की सेना थी। उल्लेखनीय है कि गांधीजी द्वारा बनाई गई एम्बुलेंस यूनिट में 1100 भारातीय

थे जिनमें 800 गिरमिटिया मजदूर थे। युद्ध के दौरान इस यूनिट ने बहादुरी की मिसाल कायम की।







दमन डे!! अनोखा


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी


दिसम्बर - शायद कम ही लोग यह जानते है की १९ दिसम्बर को हमारे यहाँ भारत के एक केन्द्र शाशित राज्य दमन & दिव में एक अनोखे तरह का आयोजन किया जाता है ! १९ दिसम्बर को दमन डे मनाया जाता है लेकिन
यह अलग बात है की इस दिन को हर रास्ट्रीय त्यौहार की तरह दारू की दुकाने बंद नही कीजाती , जगह जगह नेताओ की भासन नही सुनना पड़ता और न ही किसी को किसी के घरजकर एक दुसरे को बधाई देने की जरूरत होती है

इस दिन को लोग मिलते जुलते तो है एअक दुसरे से पर किसी के घर में नही बल्कि सपना , चादनी या कैरिश्मा टाइप बार में और पुरे नही आधे होशो -हवाश में , है खाश बात ?

चलिए अब मै आपको यहाँ की कुछ गतिविधिया जो की १९ दिसम्बर के लिए होती है बता दु।
१८ को अगर आप शाम को दमन की सड़को पे निकलगे तो सजती हुई दुकानों को देखकर ऐसा एहसास होता है की जैसे कल के भारत मिलाप की तैयारी हो रही हो मगर भाई एक बात भिन्न होता है भारत मिलाप में मिठाई की दुकाने सजती है और यहाँ दारू की।
अगले दिन सरे सरकारी गैर सरकारी संस्थाने बंद रहती है . ऑटो टैक्सी वालो की मानो जैसे धूम सी जाती है सुबह पहली फ्लाईंग रानी से लेकर दोपहर के सौरास्त्र एक्सप्रेस तक सूरत और मुंबई से आने वाले और जिनके पास ख़ुद का साधन है अपनी निजी गाड़ी से दमन आते है
दरिया किनारे हाथ में ५००० स्ट्रांग बियर या फ़िर कोई देसी रम आदि लेकर लोग बाटल हवा में और ख़ुद नशे में लहराते रहते है , कभी कोई परिचित मिल गया तो नशे में ही थोडी बहुत बाते कर ली नही तो अपने में ही मस्त


मजे की बात तो यह होती है की यहाँ आने के बाद अपनी निगाह में थोड़ा महिलाओ की इज्जत कम हो जाती है क्योकि सायद कम ही सुना जाता है की महिलाये पियक्कड़ है पर यहाँ देखने को मिलाताहै की कितनी आगे है
पुरे दिन यही चलता है लोग आते है पीते है और
गाँधी जी को चिडाकर चले जाते है की देख लो तुम्हारे प्रदेश में बंद हुआ तो क्या हुआ बगल मेंही पी रहा हु !!!!!!