क्या है सच्चाई ???जिस ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए उन्होंने अंहिसा को अपना प्रमुख हथियार बनाया वही गांधी कभी ब्रिटिश फौज का हिस्सा भी थे। यह बात भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन पूरी तरह सच है। रक्षा मंत्रालय ने ब्रिटिश फौज की वर्दी में बापू की फोटो प्रकाशित की है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित होने वाली 'सैनिक समाचार' पत्रिका के 100 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में एक स्मारिका प्रकाशित की जा रही है। स्मारिका में फौजी वर्दी में गांधीजी की फोटो सहित इतिहास के कई दुर्लभ तथ्यों को शामिल किया गया है।
1889 में ब्रिटिश सेना में शामिल हुए गांधी ने एम्बुलेंस यूनिट में काम किया था। इतना ही नहीं अफ्रीका में बोअर युद्ध में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें पदक देकर सम्मानित भी किया गया था। स्मारिका में प्रकाशित लेख के अनुसार गांधी को फौज में जगह देना अंग्रेजों के लिए तो चुनौतीपूर्ण था ही खुद गांधी के लिए भी यह कम बड़ी चुनौती नहीं थी। तब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में थे। बोअर युद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश फौज में एम्बुलेंस इकाई के गठन का सुझाव दिया। कुछ अंग्रेज अधिकारियों ने उनके सुझाव की खिल्ली उड़ाई। नटाल के गवर्नर गांधीजी के मित्र थे। उनकी मदद से गांधीजी एम्बुलेंस यूनिट स्थापित करने में सफल हो गए। गांधी के इस सुझाव के पीछे कुछ खास वजहें थीं।
बोअर युद्ध में अंग्रेजों की स्थिति कमजोर थी। अफ्रीका की 48 हजार सैनिकों की फौज के मुकाबले उनके पास सिर्फ 27 हजार की सेना थी। उल्लेखनीय है कि गांधीजी द्वारा बनाई गई एम्बुलेंस यूनिट में 1100 भारातीय
थे जिनमें 800 गिरमिटिया मजदूर थे। युद्ध के दौरान इस यूनिट ने बहादुरी की मिसाल कायम की।
भाई पंकज जी आपने बडी सुन्दर भाषा मे यह उप्योगी जानकारी दी ! इसके लिये आपका आभार ! वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा लिजिये तो टिपणीकर्ताओ को सहुलियत रहेगी !
ReplyDeleteमजा आया आपके पुराने लेखों को पढ कर भी !
रामराम !
mast pankaj bhai...isi tarah hame naye naye jaankaariyaan dete rahe....
ReplyDelete@ ताऊजी,
ReplyDeleteताऊ जी आपकी ये पहली टिपण्णी मेरे लिए वैसे ही है जैसे किसी हीरो को पहले पिक्चर में क!म मिला हो अरे नही ताऊ अपने आप को हीरो नही मन रहा हीरो तो आप हो असली ।
और हाँ मै वर्ड वेरिफिकेशन हटा लिया हु ।
good pankaj keep it up
ReplyDeletenice post i found you on chitthagajat i heve no blog id
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