काफी समय पहले ऍक गीत आया था " ये कहा आ गये हम यु साथ चलते२"
आज जमाना बदल गया
सुबह जब मै घर से ऑफिस के लिए निकला तो हर रोज की तरह धोबी कपडे धो रहा दुकानदार दुकान में धूपबत्ती दिखा रहा था बच्चे खेल रहे थे ! सब मिलाकर सिर्फ़ इतना कहना है की सब कुछ सामान्य दिख रहा था
लेकिन जब ट्रेन में बैठने गया तो जहा कभी खड़े होने की जगह नही रहती थी आज लोग शान से टांग फैलाकर सोते हुए नजर आ रहे थे मुझे ताज्जुब हुआ होना लाजिमी भी था !
मैंने एक बहुत ही अधेड़ टाइप के भाई साहब से पूछा तो उन्होंने हसते हुए जवाब दिया " अरे यार भला कभी तो सीट मिली आ जा बैठ इधर आज अपना मुंबई में बोम्ब ब्लास्ट हुआ है बस उसी का नतीजा है "
पर उसके कहने से मै एक बात का नोटिस किया की ओ बंद जैसे किसी प्रशस्ति पत्र के मिलाने का कारन बता रहा हो अन्दर इतना गुमान था !
अब दुसरे तरफ़ देखिये १८-२० साल के ६ लडके आपस में बात कर रहे है !
पहला -अबे बेन के ....... आज तो मैंने टिकेट ही नही लिया ।
दूसरा -अबे साले तुझे आज भी चैन नही है आज तो आखा फोर्स टी टी मुंबई में गयेला है तेरा टिकेट कौन चेक करेगा तेरा बाप्पू या तेरी ............
मै ये नही कहता की सोचते ही नही है आज देश की ये स्थिति है की सभी लोग खूब सोचते है पर क्या सोचते है सिर्फ़ अपनी सलेरी बदने के बारे में अपने बच्चो के दाखिले के बारे में अपने माँ बाप के बारे नही अपने बहिन के बारे नही
ये सब तो छोड़ो अपने देश के बारे में भी नही
ख़ुद का बच्चा है तो उसके किए रेस्पेक्ट से बात करेगे और उसे अच्छी बाते बतायेगे और अगर उसी उमर का कोई गैर लड़का और थोड़ा गरीब या लाचार है तो उसके साथ गन्दी गन्दी मजाक करेगे और ये सभी कराने वाले एक अच्छे समाज में गिने जाते है
शर्म नही आती ऐसी ओची हरकते करते हुए।
बस अभी तो इतना हे लिखुगा आगे आप सब का आशीर्वाद रहेगा तो ...............................
पर समझ में नही आता ये कहा जा रहे हम ???????????
Thursday, November 27, 2008
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