मुंबई में हुए लगातार ६० घंटे की महातान्डव जो की आतंकवादियो के द्वारा खेला गया
अब पता नही ये आतंकवादी कहा से आए पर अगर प्रशाशन मोदी और केन्द्र सरकार की माने तो उनके हिसाब से ये सारे आतंकवादी पाकिस्तान और कराची से पानी के रस्ते हमारे हिंदुस्तान की जान ( ना की सिर्फ़ ठाकरे बंधुओ ) मुंबई के ताज यानि की हिंदुस्तान की ताज पर आकर कब्जा जमाया भले ही वह सिर्फ़ ३ दिन के लिए ही सही ।
अब बात ये आती है की चारो तरफ़ जो की हमारी आम जनता बोली जाती जिसमे से एक मै भी हु यह कहते सुन रहा हु की " भला बताइए ये साले ( माफ़ करना मै तो किसी और को नही कहता पर इनको मै भी यही कहता हु ) गुजरात से मुंबई तक कैसे गए ?
लेकिन मै आप सबको एक सच बताने जा रहा हु जो की मै पिछले १८ महीने से देख रहा हु ।दरअसल मै यहाँ गुजरात और मुंबई के सीमा पर रहता हु अब मै जब से ट्रेन से यात्रा कर रहा हु कभी मेरा टिकिट( ये अलग बात है की मै बिना टिकिट यात्रा नही करता ) या सामान नही चेक हुआ न तो मेरा लैपटॉप या अन्य सामान चेक हुआ अब आप ये बताओ अगर मेरी जगह कोई आतंकवादी अगर रहेगा तो १८ महीने में पता नही कितने बोरे बम्ब गुजरात से मुंबई कर सकता है
पिछले महीने मै मुंबई शिवाजी टर्मिनस से वाराणसी के लिए गया मेरे पास २ एयर बैग १ लैपटॉप २ इन्टरनेट एक्सेस कार्ड था मुझे एक बार भी रस्ते में कोई ये नही पूछा की आप क्या करते हो और ये सब का बिल या आपका परिचय पत्र है क्या ।
अब आप सोचो क्या आतंकवादियो के लिए स्पेशल लिखा हुआ ट्रेन आता है क्या की ( आतंकवादियो के लिए आराछित ) वो भी तो हम आम लोगो की तरह जाते है
वही पुलिस वाले हर बिहारी से आराम से सामान के मुताबिक १००-५० रुपये नजराना लेते है जैसे की अपनी बहन की गोदभराई के लिए भीख माग रहे हो सोरी ज्यादा बोल दिया न पर क्या करू त्रस्त हु ।
दूसरी तरफ़ हमारे ट्रेन के सहचालक जिनको की बड़े प्यार से गार्ड बोला जाता है ओ भाई साहब भी कम नही होते ट्रेन रुकते ही कुछ मजदुर टाइप के लोग आकर ढेर सारे कार्टून लगेज में डाल देते है और ये महाशय सिर्फ़ ये पूछते है की पेपर है और मै अपनी आँखों से देखा है पेपर सिर्फ़ नोट लपेटने के लिए होता है अन्दर नोट होती है कम होता है तो काफी टाइम तक ट्रेन को रुकवा के रखते है और कभी भी भाई साहब ये नही पूछते की कार्टून के अन्दर क्या है क्युकी इनके ऊपर देश प्रेम से ज्यादा स्त्री और संतान प्रेम होता है हो सकता बच्चे के लिए नोकिया एन ९५ या बेटी के लिए नयी स्कूटी लेनी हो अगर ये पूछ लेगे तो सामने वाला इनकी वाली ट्रेन से सामान नही भेजेगा और भी तो ट्रेने है ।
तो ताज्जुब नही भइया आतंकवादी इन्ही रास्तो हमारी आपकी तरह गए है ।
ताऊ की प्रेरणा से चित्र
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