
१९ दिसम्बर - शायद कम ही लोग यह जानते है की १९ दिसम्बर को हमारे यहाँ भारत के एक केन्द्र शाशित राज्य दमन & दिव में एक अनोखे तरह का आयोजन किया जाता है ! १९ दिसम्बर को दमन डे मनाया जाता है लेकिन
यह अलग बात है की इस दिन को हर रास्ट्रीय त्यौहार की तरह दारू की दुकाने बंद नही कीजाती , जगह जगह नेताओ की भासन नही सुनना पड़ता और न ही किसी को किसी के घरजकर एक दुसरे को बधाई देने की जरूरत होती है
। इस दिन को लोग मिलते जुलते तो है एअक दुसरे से पर किसी के घर में नही बल्कि सपना , चादनी या कैरिश्मा टाइप बार में और पुरे नही आधे होशो -हवाश में , है न खाश बात ?
चलिए अब मै आपको यहाँ की कुछ गतिविधिया जो की १९ दिसम्बर के लिए होती है बता दु।
१८ को अगर आप शाम को दमन की सड़को पे निकलगे तो सजती हुई दुकानों को देखकर ऐसा एहसास होता है की जैसे कल के भारत मिलाप की तैयारी हो रही हो मगर भाई एक बात भिन्न होता है भारत मिलाप में मिठाई की दुकाने सजती है और यहाँ दारू की।
अगले दिन सरे सरकारी गैर सरकारी संस्थाने बंद रहती है . ऑटो टैक्सी वालो की मानो जैसे धूम सी आ जाती है सुबह पहली फ्लाईंग रानी से लेकर दोपहर के सौरास्त्र एक्सप्रेस तक सूरत और मुंबई से आने वाले और जिनके पास ख़ुद का साधन है ओ अपनी निजी गाड़ी से दमन आते है ।
दरिया किनारे हाथ में ५००० स्ट्रांग बियर या फ़िर कोई देसी रम आदि लेकर लोग बाटल हवा में और ख़ुद नशे में लहराते रहते है , कभी कोई परिचित मिल गया तो नशे में ही थोडी बहुत बाते कर ली नही तो अपने में ही मस्त ।
मजे की बात तो यह होती है की यहाँ आने के बाद अपनी निगाह में थोड़ा महिलाओ की इज्जत कम हो जाती है क्योकि सायद कम ही सुना जाता है की महिलाये पियक्कड़ है पर यहाँ देखने को मिलाताहै की ओ कितनी आगे है ।
पुरे दिन यही चलता है लोग आते है पीते है और
गाँधी जी को चिडाकर चले जाते है की देख लो तुम्हारे प्रदेश में बंद हुआ तो क्या हुआ बगल मेंही पी रहा हु !!!!!!
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