आश्चर्य (१)


हिंदुस्तान में ऐसा कोई बाजार नहीं होगा, जहां सोने के आभूषणों की दुकान नहीं हो। लेकिन कांगड़ा जिले [हिमाचल] का बैजनाथ कस्बा इस मामले में अपवाद है। यहां आभूषणों की एक भी दुकान नहीं है। कहते हैं, दुकानें तो यहां कई लोगों ने खोलीं, मगर या तो इनको खोलने वाले उजड़ गए या फिर उनकी दुकान तबाह हो गई।
यही कारण है कि बैजनाथ कस्बे में कोई भी सुनार आज तक आभूषणों की दुकान खोलने का साहस नहीं कर पाया है। दिलचस्प तो यह है कि बैजनाथ से महज आधे किलोमीटर के फासले पर बसे पपरोला बाजार में आभूषणों की करीब पचास दुकानें हैं। बैजनाथ में सुनारों की दुकानें न होने के पीछे एक शाप को कारण माना जाता है।
यहाँ के लोगो का कहना है कि मां पार्वती ने एक बार भगवान शिव से सोने का महल बनाने की प्रार्थना की थी। इसके बाद शिव ने विश्वकर्मा के माध्यम से सोने का भवन रावण की लंका में बनवाया था। इस स्वर्ण महल में प्रतिष्ठा का कार्य चल रहा था तथा रावण के पिता विश्रवा एक पुरोहित के रूप में इस कार्य को संपन्न करवा रहे थे। बाद में जब भगवान शिव ने पुरोहित विश्रवा से दक्षिणा के बारे में पूछा तो विश्रवा ने शिव से दान के रूप में सोने की लंका ही मांग ली। शिव इस मांग को ठुकरा नहीं पाए। उसी समय लंका का निर्माण करने वाले विश्वकर्मा के वेश में एक सुनार वहां पहुंच गया तथा उसने इस महल को बनाने का मेहनताना मांगा। जिस पर शिव ने उसे धन दे दिया। तभी असली विश्वकर्मा वहां पहुंच गए। शिव व पार्वती को सच्चाई का पता चला तो मां पार्वती ने गुस्से में आकर विश्वकर्मा के वेश में आए सुनार को शाप देते हुए कहा कि जिस भी स्थान पर मैं और भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर रूप में होंगे तुम वहां कुछ नहीं कमा पाओगे। बैजनाथ मंदिर में भी शिव व पार्वती अर्द्धनारीश्वर रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि उस शाप के कारण ही यहां कोई भी सुनार अपना कारोबार नहीं कर पाया। हालांकि यहां सुनार के तीन-चार परिवार हैं, मगर कोई भी आभूषण का कारोबार नहीं करता।
बैजनाथ के बुजुर्ग हरनाम कौशल व पंडित मस्त राम का कहना है कि यहां कुछ दशक पहले कई आभूषण व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोली थीं, लेकिन वे उजड़ गए। इनमें होशियारपुर का एक व्यवसायी तो अपना सारा धन गंवा बैठा था, जबकि एक दुकानदार की यहां दुकान नहीं चली थी तथा उसने बाद में नगरोटा बगवां में अपनी दुकान खोली थी। वहीं बैजनाथ मंदिर से जुड़े पुजारी ज्योति प्रकाश का कहना है कि यहां कोई शाप है इस बारे में वह नहीं जानते।
यह भी दिलचस्प है कि रावण की शिव भक्ति के कारण बैजनाथ में दशहरे के दिन रावण का दहन भी नहीं किया जाता। यहां इस बारे में भी मान्यता है कि जो भी रावण के पुतले को आग लगाता है, वह अगले दशहरे तक जीवित नहीं रह पाता।
पंकज भाई आपका ब्लॉग जगत में स्वागत है। बैजनाथ के बारे में और भी बहुत कुछ लिखा जा सकता है। आपका लेख बहुत ही अच्छा है मुझे उम्मीद है कि आप बैजनाथ के साथ जुड़ी और महत्वपूर्ण जानकारियां भी देंगे। मेरी शुभकामनाएं।
ReplyDeleteहिन्दी चिठ्ठा विश्व में आपका हार्दिक स्वागत है, मेरी शुभकामनायें आपके साथ हैं…
ReplyDeleteबहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ReplyDeletebahut he accha likha hai..isi tarah likhte rahe...
ReplyDeleteRochak jaankari mili aapse. swagat blog parivar aur mere blog par bhi.
ReplyDeleteशुक्रिया इस रोचक जानकारी का
ReplyDeleteबहुत सुंदर वास्तव में अलग सी बात है | बधाई सुंदरजानकारी की प्रस्तुति के लिए आपका लिखने पढने की दुनिया में स्वागत है निरंतरता की चाहत है ... मेरे ब्लॉग पर पधारें
ReplyDelete